गुरुवार 12 मार्च 2026 - 08:39
शोक पूर्ण माहौल में मनाया गया हज़रत अली का शहादत दिवस।नौरोज़ हैदर शाही

हौज़ा / हल्दौर। क्षेत्र के गांव छजुपुरा सादात में हज़रत अली की शहादत के अवसर पर मजलिस का आयोजन किया गया मजलिस के बाद शबीहे ताबूत हज़रत अली बरामद हुआ जो गांव के मुख्य मार्गों से होता हुआ मजार दादा सैद कमाल पर पहुंच कर दफनाया गया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हल्दौर। क्षेत्र के गांव छजुपुरा सादात में हज़रत अली की शहादत के अवसर पर मजलिस का आयोजन किया गया मजलिस के बाद शबीहे ताबूत हज़रत अली बरामद हुआ जो गांव के मुख्य मार्गों से होता हुआ मजार दादा सैद कमाल पर पहुंच कर दफनाया गया।

हज़रत अली की शहादत की मजलिस को सम्बोधित करते हुए मौलाना मैहदी अब्बास जैदी ने कहा की हज़रत अली इब्ने अबी तालिब की शहादत 21 रमजान सन् 40 हिजरी को इराक के कूफा शहर में हुई थी।

उन्हें सुबह की नमाज में अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम ने शहीद किया जब मौला नमाज की पहली रकअत का सजदा कर रहे थे। हज़रत अली उस समय इस्लाम की मदद के लिए आगे आए जब इस्लाम का कोई भी हमदर्द नहीं था।

उन्होंने इस्लाम धर्म को आम लोगों तक पहुंचाया। उनकी इसी सेवाभाव को देखते हुए हजरत मुहम्मद साहब ने उन्हें खलीफा मुकर्रर किया। हज़रत अली ने शांति और अमन का पैगाम दिया था। उन्होंने कहा था कि इस्लाम इंसानियत का धर्म है और वह अहिंसा के पक्ष में है। हजरत अली ने हमेशा राष्ट्रप्रेम और समाज से भेदभाव हटाने की कोशिश की तथा यह भी कहा था कि अपने शत्रु से भी प्रेम करो तो वह एक दिन तुम्हारा दोस्त बन जाएगा।

उनका कहना था कि अत्याचार करने वाला और उसमें सहायता करने वाला तथा अत्याचार से खुश होने वाला भी अत्याचारी ही होता है। उन्होंने यह भी कहा था कि बोलने से पहले शब्द आपके गुलाम होते हैं लेकिन बोलने के बाद आप लफ्जों के गुलाम बन जाते हैं। अत हमेशा सोच समझकर बोलें। इसके साथ ही उन्होंने भीख मांगना, एक दूसरे की बुराई करना जैसे कार्य करने को सख्त मना किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि हमेशा अपनी सोच को पानी के बूंदो से भी ज्यादा साफ रखो, क्योंकि जिस तरह बूंदों से समुंदर बनता है उसी तरह सोच से ईमान बनता है। अत अपनी जुबान की हिफाजत तथा सोच को हमेशा पाक बनाए रखों।

इस तरह अपनी ऊंची सोच से दुनिया को अहिंसा का पैगाम देने वाले हजरत अली को रमजान महीने की उन्नीसवीं तारीख को अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम मलाऊन ने कूफे की मस्जिद में सुबह की नमाज के दौरान ज़हर मे बुझी हुई तलवार से वार कर ज़खूमी कर दिया था जिस कारण इक्कीस रमजान को हज़रत अली की शहादत हो गई

मजलिस में सोज़खानी मौहम्मद रजा, नायाब हैदर, मौहम्मद अब्बास, मौहम्मद आलम, रौशन अब्बास ने पेश खानी रईस जैदी, ने तथा नौहे खानी रौशन अब्बास, मौहम्मद रज़ा ने की कार्यक्रम का संचालन मिडिया प्रभारी शाही वास्ती ने किया।

शोक पूर्ण माहौल में मनाया गया हज़रत अली का शहादत दिवस।नौरोज़ हैदर शाही

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha